Active vs Passive Mutual Funds: ‘शेफ’ चुनें या ‘रेसिपी बुक’? आपका पैसा, आपका फैसला

Active vs Passive Mutual Funds in Hindi की दुनिया में आपका स्वागत है! यह समझना ज़रूरी है कि आपके लिए एक्टिव फंड चुनें या पैसिव फंड। आपने लार्ज कैप, मिड कैप और स्मॉल कैप के बारे में तो सीख लिया, लेकिन अब आपके सामने एक और बड़ा सवाल खड़ा है: एक्टिव फंड चुनें या पैसिव फंड?

यह सवाल किसी रेस्टोरेंट में यह चुनने जैसा है कि आप आज किसी ‘स्टार शेफ’ की स्पेशल डिश खाएंगे या एक भरोसेमंद ‘रेसिपी बुक‘ से बनी क्लासिक डिश। दोनों के अपने फायदे और नुकसान हैं।

आज, paisasaarthi.com पर हम इस बड़ी दुविधा को अपनी खास “शेफ बनाम रेसिपी बुक एनालॉजी” से हमेशा के लिए सुलझा देंगे, ताकि आप अपने पैसे के लिए सही फैसला ले सकें।

एक्टिव बनाम पैसिव म्यूच्यूअल फंड्स की शेफ और रेसिपी बुक एनालॉजी।

एक्टिव म्यूच्यूअल फंड्स (Active Mutual Funds) – आपके ‘स्टार शेफ’

एक एक्टिव म्यूच्यूअल फंड में, एक प्रोफेशनल फंड मैनेजर (आपका स्टार शेफ) और उसकी टीम होती है।

इस ‘शेफ’ का एकमात्र लक्ष्य होता है एक ऐसी लाजवाब डिश (पोर्टफोलियो) बनाना जो मेनू कार्ड (मार्केट इंडेक्स जैसे Nifty 50) से बेहतर हो। इसके लिए, वह खुद बाज़ार जाकर सबसे अच्छी और ताज़ी सामग्री (बेस्ट स्टॉक्स) चुनता है, अपनी सीक्रेट रेसिपी (रिसर्च और एनालिसिस) का इस्तेमाल करता है, और कब कौन सी सामग्री डालनी या निकालनी है, इसका फैसला भी खुद ही लेता है।

एक्टिव फंड्स के फायदे (Pros):

मार्केट को हराने की क्षमता: अगर आपका ‘शेफ’ (फंड मैनेजर) बहुत कुशल है, तो वह मार्केट के औसत रिटर्न से कहीं ज़्यादा रिटर्न बना सकता है।

विशेषज्ञ प्रबंधन (Expert Management): आपके पैसे को विशेषज्ञों की एक टीम मैनेज करती है जो बाज़ार पर लगातार नज़र रखती है।

एक्टिव फंड्स के नुकसान (Cons):

ज़्यादा फीस (High Expense Ratio): एक स्टार शेफ अपनी विशेषज्ञता के लिए ज़्यादा फीस लेता है। इसी तरह, एक्टिव फंड्स का एक्सपेंस रेश्यो (फीस) बहुत ज़्यादा होता है (1% से 2.5% तक)।

प्रदर्शन की कोई गारंटी नहीं: इस बात की कोई गारंटी नहीं है कि शेफ की डिश हमेशा अच्छी ही बनेगी। कई बार, 70-80% एक्टिव फंड्स लंबी अवधि में मार्केट को हरा ही नहीं पाते।

फंड मैनेजर पर निर्भरता: फंड का प्रदर्शन पूरी तरह से फंड मैनेजर की काबिलियत पर निर्भर करता है।

एक एक्टिव फण्ड मैनेजर जो बेस्ट स्टॉक्स चुन रहा है।

पैसिव म्यूच्यूअल फंड्स (Passive Mutual Funds) – आपकी ‘रेसिपी बुक’

एक पैसिव म्यूच्यूअल फंड (जिसे इंडेक्स फंड भी कहते हैं) का कोई स्टार शेफ नहीं होता। यह एक रेसिपी बुक या McDonald’s की तरह काम करता है।

इसका लक्ष्य कोई नई या अनोखी डिश बनाना नहीं है। इसका एकमात्र लक्ष्य एक पहले से तय रेसिपी (जैसे Nifty 50 इंडेक्स) को हूबहू कॉपी करना है। अगर रेसिपी में लिखा है ‘2 चम्मच नमक’, तो यह ठीक 2 चम्मच नमक ही डालेगा, न कम, न ज़्यादा।

यह फंड बस Nifty 50 में शामिल टॉप 50 कंपनियों को उसी अनुपात में खरीद लेता है और चुपचाप बैठ जाता है। इसमें कोई मैनेजर अपनी दिमागी कसरत नहीं करता।

पैसिव फंड्स के फायदे (Pros):

बहुत कम फीस (Very Low Expense Ratio): क्योंकि कोई स्टार शेफ नहीं है, इसलिए इसकी फीस बहुत कम होती है (0.1% से 0.5% तक)। आपका पैसा फीस में बर्बाद नहीं होता।

भरोसेमंद और पारदर्शी (Predictable & Transparent): आपको हमेशा पता होता है कि आपका पैसा कहाँ लगा है। इसका रिटर्न लगभग मार्केट के बराबर ही होता है, न ज़्यादा, न कम।

समझने में आसान: यह नए निवेशकों के लिए बहुत ही सरल और सीधा विकल्प है।

पैसिव फंड्स के नुकसान (Cons):

मार्केट को कभी नहीं हराएगा: यह हमेशा मार्केट के औसत रिटर्न के आस-पास ही रहेगा, उससे बेहतर प्रदर्शन कभी नहीं करेगा।

कोई सुरक्षा नहीं: अगर पूरा बाज़ार (इंडेक्स) गिरता है, तो आपका फंड भी ठीक उतना ही गिरेगा। इसमें कोई बचाने वाला मैनेजर नहीं होता।

एक पैसिव फण्ड जो एक तय रेसिपी बुक (इंडेक्स) को फॉलो करता है।

एक्टिव बनाम पैसिव फंड्स: एक नज़र में

पैरामीटरएक्टिव फंड (स्टार शेफ)पैसिव फंड (रेसिपी बुक)
लक्ष्यमार्केट को हरानामार्केट की नकल करना
लागत (फीस)ज़्यादा (1% – 2.5%)बहुत कम (0.1% – 0.5%)
कंट्रोलफंड मैनेजर के हाथ मेंकंप्यूटर एल्गोरिथ्म द्वारा
रिटर्न की उम्मीदमार्केट से ज़्यादा (संभावित)मार्केट के बराबर
किसके लिए सहीजो एक्सपर्ट्स पर भरोसा करते हैंजो कम लागत और सादगी चाहते हैं

तो, आपको ‘शेफ’ चुनना चाहिए या ‘रेसिपी बुक’?

इसका कोई एक सही जवाब नहीं है। यह आपकी सोच और ज़रूरत पर निर्भर करता है।

आप ‘शेफ’ (एक्टिव फंड) चुनें अगर:

आपको विश्वास है कि आप एक कुशल फंड मैनेजर ढूंढ सकते हैं जो लगातार मार्केट को हरा सकता है।

आप ज़्यादा रिटर्न की क्षमता के लिए ज़्यादा फीस देने को तैयार हैं।

आप अपने फंड के प्रदर्शन को सक्रिय रूप से ट्रैक करना चाहते हैं।

आप ‘रेसिपी बुक’ (पैसिव फंड) चुनें अगर:

आप निवेश को सरल रखना चाहते हैं और “सेट इट एंड फॉरगेट इट” (set it and forget it) दृष्टिकोण पसंद करते हैं।

आपका मानना है कि लंबी अवधि में ज़्यादातर शेफ (मैनेजर) अपनी फीस निकालकर रेसिपी बुक को नहीं हरा पाते (जैसा कि वॉरेन बफेट भी मानते हैं)।

आप अपने निवेश की लागत को न्यूनतम रखना चाहते हैं।

यह जानने के लिए कि आपके लिए कौन से फण्ड सही हैं, हमारा लार्ज कैप, मिड कैप और स्मॉल कैप वाला गाइड ज़रूर पढ़ें।

निष्कर्ष: Active vs Passive Mutual Funds in Hindi – क्या चुनें?

तो, active vs passive mutual funds in hindi की बहस का क्या नतीजा है? नतीजा यह है कि यह एक निवेश से ज़्यादा एक दार्शनिक (philosophical) सवाल है।

क्या आप एक विशेषज्ञ शेफ की कला पर दांव लगाना चाहते हैं, या एक आजमाई हुई रेसिपी बुक के विज्ञान पर भरोसा करना चाहते हैं? आपका पैसा, आपका फैसला।

इनके साथ साथ आपको equity,debt and hybrid funds के बारे में भी जानना चाहिए |

बहुत से विशेषज्ञ दोनों का मिश्रण रखने की सलाह देते हैं – कुछ पैसा शेफ को और कुछ रेसिपी बुक को। लेकिन एक नए निवेशक के लिए, कम लागत और सादगी की वजह से पैसिव/इंडेक्स फंड अक्सर एक बेहतरीन शुरुआती बिंदु होता है।

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