अगर आप जानना चाहते हैं कि expense ratio kya hai, तो सोचिए आप एक शानदार रेस्टोरेंट में दोस्तों के साथ खाना खाने गए। आपने मेनू देखा, अपनी पसंदीदा डिश ऑर्डर की और खाने का भरपूर आनंद लिया।
बिल आया ₹2000। लेकिन जब आपने उसे ध्यान से देखा तो उसमें नीचे एक लाइन लिखी थी: ‘Service Charge: ₹200’। आपका कुल बिल बन गया ₹2200।
यह ₹200 वो कीमत थी जो आपने रेस्टोरेंट के मैनेजमेंट, शेफ की सैलरी और बाकी खर्चों के लिए चुकाई। यह खाने की कीमत में शामिल नहीं थी, पर यह आपकी जेब से ही गयी।
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म्यूच्यूअल फंड की दुनिया में भी बिलकुल ऐसा ही एक छिपा हुआ चार्ज होता है, जिसे एक्सपेंस रेश्यो (Expense Ratio) कहते हैं। यह वो फीस है जो आपके मुनाफे को चुपके-चुपके कम करती रहती है, और ज़्यादातर निवेशकों को इसका पता भी नहीं चलता।
आज, paisasaarthi.com पर हम इसी ‘सर्विस चार्ज’ की पहेली को सुलझाएंगे, इसके हर पहलू को गहराई से जानेंगे और यह सीखेंगे कि आप इसे कम से कम कैसे रख सकते हैं।

एक्सपेंस रेश्यो आखिर है क्या?
एक्सपेंस रेश्यो वह वार्षिक (annual) फीस है जो म्यूच्यूअल फंड कंपनी (AMC – Asset Management Company) आपके द्वारा निवेश किए गए पैसे को मैनेज करने के लिए लेती है।
यह आपके कुल निवेश का एक निश्चित प्रतिशत (%) होता है, जिसे हर दिन थोड़ी-थोड़ी मात्रा में काटा जाता है।
रेस्टोरेंट की भाषा में:
यह वही ‘सर्विस चार्ज’ है जो रेस्टोरेंट अपने शेफ (फंड मैनेजर), वेटर्स और बाकी स्टाफ को सैलरी देने और रेस्टोरेंट को चलाने के लिए लेता है। जैसे आपको सर्विस चार्ज का पता बिल आने पर चलता है, वैसे ही एक्सपेंस रेश्यो भी फंड की NAV (Net Asset Value) में एडजस्ट कर दिया जाता है, और आपको इसका सीधा बिल कभी नहीं मिलता।
एक्सपेंस रेश्यो में क्या-क्या शामिल होता है?
यह ‘सर्विस चार्ज’ कई छोटे-छोटे खर्चों से मिलकर बनता है। मुख्य रूप से इसमें शामिल हैं:
फंड मैनेजमेंट फीस: यह सबसे बड़ा हिस्सा होता है। यह फंड मैनेजर और उनकी रिसर्च टीम को दी जाने वाली सैलरी है जो आपके लिए सही स्टॉक्स चुनने का काम करते हैं।
एडमिनिस्ट्रेटिव खर्चे: इसमें फंड के日常 के काम, जैसे कस्टमर सपोर्ट, रिकॉर्ड रखना आदि के खर्चे शामिल हैं।
रजिस्ट्रार और ट्रांसफर एजेंट फीस: ये आपके निवेश का हिसाब-किताब रखने वाली संस्थाएं होती हैं।
मार्केटिंग और डिस्ट्रीब्यूशन खर्चे: फंड को प्रमोट करने और एजेंट्स को कमीशन देने के खर्चे। (यह रेगुलर प्लान में ज़्यादा होता है)।
यह आपकी जेब पर कैसे और कितना असर डालता है?
यह समझना सबसे ज़रूरी है कि यह छोटा सा दिखने वाला प्रतिशत आपके लाखों रुपये का नुकसान कैसे कर सकता है।
मान लीजिए आपने एक फंड में ₹1,00,000 का निवेश किया और उस फंड का एक्सपेंस रेश्यो 1.5% है। इसका मतलब है कि फंड कंपनी उस साल आपके निवेश को मैनेज करने के लिए ₹1500 काट लेगी, चाहे आपको मुनाफा हो या नुकसान।
यह तो हुई एक बार की बात। लेकिन जब आप 20-25 साल तक SIP करते हैं, तो Power of Compounding की वजह से यह छोटा सा फर्क बहुत बड़ा बन जाता है।
आइए, एक टेबल से देखते हैं कि सिर्फ 1% ज़्यादा एक्सपेंस रेश्यो देने से कितना बड़ा फर्क पड़ता है:(यह मानकर कि आप ₹10,000 की मासिक SIP कर रहे हैं)
| समय | निवेशित रकम | रिटर्न (12%) – Direct Plan (1% ER | रिटर्न (11%) – RegularPlan (2% ER) | अंतर (नुकसान) |
| 10 साल | ₹12 लाख | ~ ₹23.2 लाख | ~ ₹21.6 लाख | ~ ₹1.6 लाख |
| 20 साल | ₹24 लाख | ~ ₹1 करोड़ | ~ ₹89 लाख | ~ ₹11 लाख |
| 30 साल | ₹36 लाख | ~ ₹3.5 करोड़ | ~ ₹2.8 करोड़ | ~ ₹70 लाख |
देखा आपने? सिर्फ 1% ज़्यादा फीस देने से 30 साल में आपका ₹70 लाख का नुकसान हो सकता है!
इसे कम कैसे रखें? (The Secret to a Lower Bill)
एक्सपेंस रेश्यो को कम रखने का सबसे अच्छा और एकमात्र तरीका है हमेशा Direct Plan में निवेश करना।
Regular Plan: यह उस रेस्टोरेंट की तरह है जो आपको लाने वाले ‘गाइड’ (एजेंट/डिस्ट्रीब्यूटर) को भी कमीशन देता है, इसलिए वह आपसे ज़्यादा ‘सर्विस चार्ज’ (एक्सपेंस रेश्यो) लेता है।
Direct Plan: यह उस रेस्टोरेंट की तरह है जहाँ आप खुद चलकर आते हैं, इसलिए वह आपसे कोई कमीशन नहीं लेता। यहाँ आपका एक्सपेंस रेश्यो हमेशा कम होता है।

किसी फंड का एक्सपेंस रेश्यो कहाँ देखें?
आप किसी भी फंड का एक्सपेंस रेश्यो आसानी से इन जगहों पर देख सकते हैं:
Moneycontrol, Value Research Online जैसी वेबसाइट्स पर।
Groww, Zerodha Coin जैसे ऐप्स में फंड की डिटेल्स में।
फंड कंपनी (AMC) की वेबसाइट पर।
यह हमेशा साफ़-साफ़ लिखा होता है, आपको बस उसे देखने की आदत डालनी है।

अब आप समझ गए होंगे कि expense ratio kya hai और यह किन खर्चों से मिलकर बनता है।
तो, expense ratio kya hai? यह आपके निवेश का वो सर्विस चार्ज है जिसे नज़रअंदाज़ करने की गलती आपको बहुत महंगी पड़ सकती है।
जैसे एक समझदार ग्राहक रेस्टोरेंट में बिल को ध्यान से देखता है, वैसे ही एक समझदार निवेशक को किसी भी म्यूच्यूअल फंड में पैसा लगाने से पहले उसके एक्सपेंस रेश्यो को ज़रूर देखना चाहिए।
याद रखें, जितना कम ‘सर्विस चार्ज’, उतना ज़्यादा पैसा आपकी जेब में!