SIP में पैसे कम क्यों होते हैं? Rupee Cost Averaging का जादू समझें

क्या आप जानना चाहते हैं कि SIP me Rupee Cost Averaging kya hai? अक्सर नए निवेशक अपनी SIP को लाल (नुकसान में) देखकर घबरा जाते हैं, लेकिन सच तो यह है कि आप अनजाने में पैसा बनाने का सबसे शक्तिशाली तरीका इस्तेमाल कर रहे हैं।

सबसे बड़ा डर: SIP लाल (Negative) क्यों दिखती है?

सबसे पहले, यह समझना ज़रूरी है कि आपका पैसा SIP में ‘कम’ नहीं हुआ है, बल्कि उसकी कीमत (Value) अस्थायी रूप से घट गई है।

आपका पैसा म्यूच्यूअल फंड की यूनिट्स खरीदने में लगता है, और इन यूनिट्स की कीमत (जिसे NAV कहते हैं) हर दिन शेयर बाज़ार के साथ ऊपर-नीचे होती है।

जब बाज़ार नीचे जाता है, तो आपके खरीदे हुए म्यूच्यूअल फंड की कीमत (NAV) भी अस्थायी रूप से कम हो जाती है, और इसीलिए आपका निवेश लाल दिखता है।

यह बिलकुल सामान्य है।यह अस्थायी गिरावट ही वह वजह है जिसे समझने के लिए यह जानना ज़रूरी है कि SIP me Rupee Cost Averaging kya hai.

Rupee Cost Averaging को “सब्जी मंडी” के उदाहरण से समझें

इस मुश्किल लगने वाले कॉन्सेप्ट को एक बहुत ही आसान कहानी से समझते हैं।

मान लीजिए आपके पास हर महीने टमाटर खरीदने के लिए ₹100 का बजट है।

जनवरी में, टमाटर की कीमत ₹20 प्रति किलो थी। आपने अपने ₹100 में 5 किलो टमाटर खरीदे।

फरवरी में, टमाटर की पैदावार अच्छी हुई और कीमत गिरकर direct ₹10 प्रति किलो हो गई। इस बार, आपने अपने उतने ही पैसों में दोगुने, यानी 10 किलो टमाटर खरीदे!

आपने क्या नोटिस किया? जब टमाटर सस्ते थे, तो आपने अपने उतने ही पैसों में ज़्यादा टमाटर खरीदे। यही Rupee Cost Averaging का जादू है!

SIP में यह कैसे काम करता है? (NAV और यूनिट्स)

अब सब्जी मंडी के उदाहरण को SIP की दुनिया में लाते हैं:

आपका ₹1000 का SIP = आपका टमाटर खरीदने का बजट।

म्यूच्यूअल फंड की NAV = टमाटर की कीमत।

म्यूच्यूअल फंड की यूनिट्स = टमाटर का वज़न (किलो)।

जब बाज़ार गिरता है और NAV (कीमत) सस्ती होती है, तो आपकी ₹1000 की SIP अपने आप उस म्यूच्यूअल फंड की ज़्यादा यूनिट्स (किलो) खरीद लेती है।

और जब बाज़ार चढ़ता है और NAV महंगी होती है, तो आपकी SIP कम यूनिट्स खरीदती है।

यह सब अपने आप होता है, आपको कुछ करने की ज़रूरत नहीं है I यह ऑटोमेटिक खरीददारी ही इस सवाल का असली जवाब है कि SIP me Rupee Cost Averaging kya hai

गिरा हुआ बाज़ार आपके लिए अच्छा क्यों है? (जो 99% लोग नहीं समझते)

एक नए और लॉन्ग-टर्म SIP निवेशक के लिए, बाज़ार का गिरना एक समस्या नहीं, बल्कि एक मौका (Opportunity) है।

गिरा हुआ बाज़ार SIP निवेशकों के लिए एक डिस्काउंट सेल की तरह होता है।

यह आपके पसंदीदा म्यूच्यूअल फंड पर लगी एक “डिस्काउंट सेल” की तरह है।

यह आपको भविष्य के लिए सस्ते में ज़्यादा यूनिट्स इकट्ठा करने का सुनहरा मौका देता है। जो लोग बाज़ार गिरने पर डरकर अपनी SIP बंद कर देते हैं, वे सस्ते में खरीदने का यह मौका गँवा देते हैं।

लेकिन जो टिके रहते हैं, वे लंबी अवधि में सबसे ज़्यादा पैसा कमाते हैं। बेशक, यह ‘सेल’ का फायदा उठाने की रणनीति सबसे अच्छा काम तब करती है जब आप एक अच्छे और मज़बूत फंड में निवेश कर रहे हों|

क्या Rupee Cost Averaging का कोई नुकसान भी है?

यह एक बहुत ही एडवांस सवाल है। हाँ, एक स्थिति में Rupee Cost Averaging का एक सैद्धांतिक (theoretical) नुकसान है।

Rupee Cost Averaging के नुकसान का विश्लेषण करता एक निवेशक।

अगर बाज़ार लगातार, बिना गिरे, कई सालों तक सिर्फ ऊपर ही ऊपर जाता रहे (जिसे ‘बुल रन’ कहते हैं), तो शुरुआत में ही किया गया एकमुश्त (Lumpsum) निवेश ज़्यादा फायदेमंद होगा।

लेकिन, 99% आम निवेशकों के लिए यह सिर्फ एक थ्योरी है। क्यों? क्योंकि कोई भी बाज़ार को इतनी सटीकता से टाइम नहीं कर सकता।

एक आम निवेशक के लिए, बाज़ार के उतार-चढ़ाव के जोखिम से बचने और अनुशासित रहने के लिए SIP और Rupee Cost Averaging ही सबसे सुरक्षित और स्मार्ट तरीका है।

यह आपको ‘गलत समय’ पर सारे पैसे लगा देने के जोखिम से बचाता है।इसलिए ज़्यादातर एक्सपर्ट्स मानते हैं कि आम निवेशक के लिए यह समझना ज़रूरी है कि SIP me Rupee Cost Averaging kya hai, न कि बाज़ार को टाइम करने की कोशिश करना।

निष्कर्ष: SIP me Rupee Cost Averaging Kya Hai?

तो अगली बार जब आप अपनी SIP को लाल देखें, तो घबराएं नहीं। मुस्कुराएं! क्योंकि आपको पता है कि आपका ‘सारथी’ (आपकी SIP) आपके लिए सस्ते में ज़्यादा यूनिट्स खरीद रहा है। Groww App से आसानी से अपनी SIP शुरू कर सकते हैं ,SIP में Rupee Cost Averaging kya hai, यह समझना आपको एक डरे हुए निवेशक से एक स्मार्ट और आत्मविश्वासी निवेशक बनाता है। याद रखें, निवेश एक मैराथन है, 100 मीटर की दौड़ नहीं।

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